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SCHOLARSHIP IN INDIA 2020

CERTIFICATE

SCHOLARSHIP BY ISCON SOCIETY

इस्कॉन मंदिर सोसायटी द्वारा चलाई जाने वाली एक ऐसी स्कॉलरशिप जो आपके बच्चे के अंदर उच्च मानवीय गुणों का विकास करती है तथा कठिन परिस्थितियों में उन्हें एक योद्धा की तरह लड़ने के लिए प्रेरित करती है ।इस प्रकार की छात्रवृत्तियां एक देश को सशक्त बनाती हैं तथा किशोर मन को संबल प्रदान करते हैं।

छात्रों के मूल्यों की स्थापना(VALUE EDUCATION IN STUDENTS)

आज हमारे देश में बहुत सारी ऐसी समस्याएँ हैं जिन का निदान संभव नहीं दिखता है। मानवता जब चारों ओर से हार जाती है, तो इसका निदान केवल शिक्षा में दिखता है। जिस देश की शिक्षा मूल्य आधारित और चरित्र आधारित होता है वह देश कभी भी हार नहीं सकता, वह देश कभी भी घुटने नहीं देख सकता है ।इसका सबसे जीवंत उदाहरण जापान है ।दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसने दो बार परमाणु हमला झेले हो और उसके बावजूद भी "एशिया का एकमात्र देश जो" विकसित देशों की श्रेणी में अपने आप को खड़ा किया है।


इसकान वेल्यू एजुकेशन ओलंपियाड

ISCON 

 इसी को ध्यान में रखते हुए स्थान इसकान वेल्यू एजुकेशन ओलंपियाड शुरू किया गया इसकान वेल्यू एजुकेशन ओलंपियाड का मकसद है की आने वाले समय में भारत के सभी बच्चों को मूल्य आधारित शिक्षा मिले इसका उनका चरित्र मजबूत हो।



 राष्ट्रीय चरित्र की जरूरत

KALAM SIR

 भारत में आज एक राष्ट्रीय चरित्र की जरूरत है। राष्ट्रीय चरित्र का मतलब यह है कि जो राष्ट्र के हित के लिए सभी व्यक्ति समान सोचे। आज हमारे देश में भिन्न-भिन्न सोच के लोग रहते हैं और यह एक प्राकृतिक सी बात है कि पांचों अंगुलिया बराबर नहीं होती ।लेकिन जब बात राष्ट्रीय चरित्र की हो, राष्ट्रीय हित की हो तो सभी व्यक्तियों को एक हो जाना चाहिए। हो सकते हैं, हमारी जातियां अलग हो सकती हैं, हमारी पसंद अलग हो सकती हैं, हमारे पहनावे अलग हो सकते हैं लेकिन हमारे देश के प्रति जो हमारी सोच है वह अलग नहीं होनी चाहिए। सागर के बारे में यह सोच अलग हो जाती है तो इससे भी बड़ा हो सकता है। देश के लिए कुछ भी नहीं हो सकता है।



बाल्यकाल 

                                                             

इसकान वेल्यू एजुकेशन का  उद्देश्य है बच्चों के अंदरूनी हिस्से दौर से ही मूल्य आधारित शिक्षा का विकास करना है ।इस सामाजिक, नैतिक आध्यात्मिक, शिक्षा को बढ़ावा दिया जाता है ।मानवता के गुणों को विकसित करना है। ईमानदारी के गुणों को प्रेरित करना है। .जब इन सभी गुणों को बाल्यकाल से ही एक बच्चे के अंदर स्थापित कर दिया जाता है तो वह बच्चा एक अच्छा छात्र बन जाता है एक अच्छा बेटा बन जाता है एक अच्छा पति बन जाता है एक अच्छा पिता बन जाता है और जो व्यक्ति इन सभी चार चरित्रों को को अपने अंदर शामिल कर लेता है तब वह एक अच्छा नागरिक बन जाता है ।जब लोग एक दूसरे को सहयोग करते हैं, दूसरे को सांत्वना देते हैं, दूसरे की भावनाओं को समझते हैं तो समाज में कटुता कम हो जाती है ।जब व्यक्ति के अंदर शांति का भाव स्थापित हो जाता है तब वह कुछ अच्छा करने की कोशिश करता है। दुनिया में जो भी देश विकसित हुए हैं उन्होंने सबसे पहले अपने यहां शुद्धता और स्वच्छता को बढ़ावा दिया है चाहे वह आंतरिक हो या वाहरी।


YOUTH

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताने की कोशिश करेंगे कि भारत में वह कौन कौन सी स्कॉलरशिप्स है छात्रवृत्तियां हैं जिनके द्वारा हम अपने बच्चों को आइंस्टीन और अंबेडकर के जैसे महान बना सकते हैं| भारत में इस समय सैकड़ों छात्रवृत्तियां चलती हैं जिनको हम जानते हैं या नहीं जानते हैं कि .लेकिन हमें बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें जानना चाहिए। उनकी परीक्षाएँ कब होती हैं परीक्षाओं का सिलेबस क्या रहता है और जब हम अपने बच्चों को इस तरीके से प्रशिक्षण प्रदान करते हैं तो हमारा बच्चा भी ईमानदारी के साथ काम करता है, और आगे बढ़ने की कोशिश करता है ।आज हम सब चीजें पैसे के बल के  खरीदने की कोशिश कर रहे हैं जो कि निहायत असंभव है ।पैसे की एक सीमा है। पैसे एक सीमा तक ही काम करत| है। उसके बाद व्यक्ति का उसका आत्मविश्वास उसकी लगन और उसका चरित्र ही उसको आगे बढ़ाते हैं ।जो भी आदमी आज दुनिया में महान है वह पैसे के बल पर नहीं बल्कि अपने विशिष्ट चारित्रिक गुणों की वजह से ।यदि इन्हीं चारित्रिक गुणों को विकसित किया गया है। तो हम बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं|



भगवान के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं 

SEMINAR


इस कोर्स के लाभ अनन्य है श्रीमदभगवतगीता जब किसी व्यक्ति के संपर्क में आ जाता हैं तो वह व्यक्ति सही निर्णय लेता है, अंदर से मजबूत हो जाता है, उसके अंदर क्या सही है क्या गलत है का निर्णय करने की शक्ति आ जाती है। हम लोग सबसे ज्यादा चिंतित अपने बच्चों को लेकर रहते हैं ।बच्चा यह नहीं जानता है कि क्या चीज उसके खाने लायक है क्या चीज़ उसके खाने लायक नहीं है ।यानी कि क्या चीज उसकी सेहत के लिए सही है और क्या चीज उसकी सेहत के लिए बुरी है। । कौन सी चीज उसको अंत समय तक संतुष्टि दे सकती है और क्या चीज है जो उसको क्षणिक सुख प्रदान करती है। ष्रीमद्भागवत गीता में वही सब चीजों पर एक बहुत सुंदर अध्ययन है और हमारे जीवन को सुखी बनाती हैं। जो व्यक्ति भगवान के नियमों को तोड़ता है उसको कष्ट सहने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह कलिकाल है जिसमें प्रार्थना का लाभ भी तुरंत मिलता है और बुरे कर्मों का दंड भी तुरंत मिलता है ।इस बात को ध्यान में रखते हुए हमें अपने जीवन को नियत और सीमित रखना चाहिए और अच्छी शिक्षा की तरफ स्वयं को अपने परिवार को अपने लोगों को। प्रेरित करना चाहिए। हमारे कर्मों का दंड अवश्य मिलता है। भगवान के यहां देर है लेकिन अंधेर नहीं ।यदि हम या हमारा कोई संबंधित गलत रास्ता पर चलता है तो उसको इसका परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा इसके साथ-साथ वह हमारी जिंदगी को भी प्रभावित करता है जिससे समाज मे अपयश और बदनामी होती है।



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